लाल किताब आधारित दोष एवं उसके उपाय

भारतीय ज्योतिष में फलकथन की अनेक पद्धतियां हैं जिनमें लाल किताब पद्धति सर्वाधिक प्रचलित है। उत्तर भारत में विशेषकर पंजाब प्रांत में लाल किताब अधिक लोकप्रिय हुई। इसमें वर्णित सहज सरल उपाय इसकी लोकप्रियता के मुख्य कारण हैं। आज की जीवन शैली में ये उपाय कुछ अजीब तो लगते हैं परंतु उपयोगी व फलदायक हैं।

वर्तमान समय में प्रचलित लाल किताब के रचयिता श्री रूपचंद जोशी हैं, जिन्होंने 1939 में फारसी में लिखी गई ज्योतिष फलकथन की एक किताब का उर्दू में अनुवाद किया और लाल किताब के नाम से छपवाया।

सन् 1952 तक इसके अनेक संस्करण छपे जिनमें से कुछ मुख्य हैं- लाल किताब गुटका, लाल किताब फरमान, लाल किताब अरमान, लाल किताब लग्न कुंडली व लाल किताब वर्ष फल कुंडली मूल उर्दू की लाल किताब में 1172 पृष्ठ हैं जिसके विभिन्न अंशों को लेकर विभिन्न लेखकों ने विभिन्न रूपों में लाल किताब की रचना की है जो बाजार में उपलब्ध हैं।

लाल किताब के अनुसार सूर्य देव ही ज्योतिष के आचार्य हैं, उन्हीं से सारा बह्मांड प्रकाशमय है। उनके बिना जीवन असंभव । जीवन में आए या आने वाले कष्टों से मुक्ति के उपायों से युक्त तथा ताम्र वर्ण (लाल रंग) वाले सूर्य देव द्वारा रचित ग्रंथ को लाल किताब नाम दिया गया। इसके अनुसार ज्योतिष कोई जादू टोना नहीं है बल्कि अपने पूर्वजन्म या इस जन्म के बुरे कर्मों से मिल रहे कष्टों से मुक्ति दिलाने का माध्यम है।

लाल किताब में ग्रहों को विभिन्न संज्ञाएं दी गई हैं जैसे सोया ग्रह, जागा ग्रह, धर्मी ग्रह, अधर्मी ग्रह, अंधा ग्रह, मंदा ग्रह, नेक ग्रह किस्मत जगाने वाला ग्रह, पक्के भाव का ग्रह कायम ग्रह, नपुंसक ग्रह आदि अनुवादित लाल किताब में भी अधिक शब्द उर्दू व फारसी के हैं। इनके साथ-साथ अंग्रेजी, पंजाबी व संस्कृत के शब्दों का भी उपयोग किया गया है। हिंदू देवी देवताओं व वृक्षों के नाम भी लाल किताब में मिल जाते हैं।

लाल किताब में वर्ष कुंडली को विशेष महत्व दिया गया है। इसके अतिरिक्त पूर्व जन्म के ऋण व उनके उपाय भी बताए गए हैं। वहीं विभिन्न ग्रहों व राशियों की स्थितियों के अनुसार शरीर व आत्मा को मिलने वाले कष्टों को विभिन्न उपायों से दूर करने की विधि भी दी गई है।

विभिन्न ऋण व उनके उपाय

लाल किताब में वर्णित, पूर्व जन्मानुसार जातक के ऊपर विभिन्न ऋण व उनके उपाय इस प्रकार हैं।

स्वऋण – जन्मकुंडली के पंचम भाव में पापी ग्रहों के होने से स्वऋण होता है। इसके प्रभाववश जातक निर्दोष होते हुए भी दोषी माना जाता है उसे शारीरिक कष्ट मिलता है, मुकदमे में हार होती है और कार्यों में संघर्ष करना पड़ता है। इससे मुक्ति के लिए जातक को अपने सगे संबंधियों से बराबर धन लेकर उस राशि से यज्ञ करना चाहिए।

मातृ ऋण – चतुर्थ भाव में केतु होने से मातृ ऋण होता है। इस ऋण से ग्रस्त जातक को धन हानि होती है, रोग लग जाते हैं, ऋण लेना पड़ता है। प्रत्येक कार्य में असफलता मिलती है। इससे मुक्ति के लिए जातक को खून के संबंधियों से बराबर चांदी लेकर बहते पानी में बहानी चाहिए।

सगे संबंधियों का ऋण – प्रथम व अष्टम भाव में बुध व केतु हों, तो यह ऋण होता है। जातक को हानि होती है, संकट आते रहते हैं और कहीं सफलता नहीं मिलती। इससे मुक्ति के लिए परिवार के सदस्यों से बराबर धन लेकर किसी शुभ कार्य हेतु दान देना चाहिए।

बहन ऋण – तृतीय या षष्ठ भाव में चंद्र हो तो बहन ऋण होता है जिससे जातक के जीवन में आर्थिक परेशानी आती है, संघर्ष बना रहता है व सगे संबंधियों से सहायता नहीं मिलती। इससे मुक्ति के लिए जातक को परिवार के सदस्यों से बराबर पीले रंग की कौडियां लेकर उन्हें जलाकर उनकी राख को पानी में प्रवाहित करना चाहिए।

पितृ ऋण – द्वितीय, पंचम, नवम या द्वादश भाव में शुक्र, बुध या राहु हो तो पितृ ऋण होता है इस ऋण से ग्रस्त व्यक्ति को वृद्धावस्था में कष्ट मिलते हैं, धन हानि होती है और आदर सम्मान नहीं मिलता। इससे मुक्ति के लिए परिवार के सदस्यों से बराबर धन लेकर किसी शुभ कार्य के लिए दान देना चाहिए।

स्त्री ऋण – द्वितीय या सप्तम भाव में सूर्य, चंद्र या राहु हो तो स्त्री ऋण होता है। इस ऋण के फलस्वरूप जातक को अनेक दुख मिलते हैं और उसके शुभ कार्यों में विघ्न आता है। इससे मुक्ति के लिए परिवार के सदस्यों से बराबर धन लेकर गायों को भोजन कराना चाहिए ।

असहाय का ऋण – दशम व एकादश भाव में सूर्य, चंद्र या मंगल हो तो यह ऋण होता है। इस ऋण से ग्रस्त जातक को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है उसकी उन्नति में बाधाएं आती हैं और हर काम में असफलता मिलती है। इससे मुक्ति के लिए परिवार के सभी सदस्यों से बराबर धन लेकर मजदूरों को भोजन कराना चाहिए।

अजन्मे का ऋण – द्वादश भाव में सूर्य, शुक्र या मंगल हो तो अजन्मे का ऋण होता है जो जातक इस ऋण से ग्रस्त होता है उसे जेल जाना पड़ता है, चारों तरफ से हार मिलती है और शारीरिक चोट पहुंचती है। इससे मुक्ति के लिए परिवार के सदस्यों से एक-एक नारियल लेकर जल में बहाना चाहिए ।

ईश्वरीय ऋण – षष्ठ भाव में चंद्र या मंगल हो तो ईश्वरीय ऋण होता है। इस ऋण के फलस्वरूप जातक का परिवार नष्ट होता है, धन हानि होती है और बंधु बांधव विश्वासघात करते मिलते हैं इसके लिए परिवार के सदस्यों से बराबर धन लेकर कुत्तों को भोजन कराना चाहिए।

रिश्तेदारों से ग्रहों के उपाय

लाल किताब में किसी खराब ग्रह को शुभ करने के लिए उस ग्रह से संबंधित रिश्तेदार की सेवा करना व उसका आशीर्वाद लेना ऐसा करने से वह खराब ग्रह अपने आप ठीक होने लगता है। उदाहरणस्वरूप खराब सूर्य को ठीक करने के लिए जातक स्वयं राजा, पिता या सरकारी कर्मचारी की सेवा करे और उनका आर्शीवाद ले। ग्रहों से संबंधित रिश्तेदार इस प्रकार हैं :-

  • सूर्य – राजा पिता या सरकारी कर्मचारी ।
  • चंद्र – माता, सास या बुजुर्ग स्त्री ।
  • मंगल – भाई, साले या मित्र ।
  • बुध – बहन, बेटी या नौ वर्ष से कम आयु की कन्याएं ।
  • गुरु – कुल पुरोहित, पिता या बुजुर्ग व्यक्ति ।
  • शुक्र – पत्नी या कोई अन्य स्त्री ।
  • शनि – नौकर मजदूर या ताया।
  • राहु – ससुर या नाना।
  • केतु – लड़का, भतीजा या नौ वर्ष से कम आयु के लड़के ।

पूजा द्वारा ग्रहों के उपाय

विभिन्न ग्रहों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए लाल किताब के अनुसार निम्नलिखित क्रिया करनी चाहिए।

  • सूर्य – हरिवंश पुराण का पाठ व सूर्य देव की उपासना ।
  • चंद्र- शिव चालीसा व सुंदर कांड का पाठ ।
  • बुध – दुर्गा चालीसा दुर्गा सप्तशती का पाठ ।
  • गुरु – श्री ब्रह्मा जी की उपासना व भागवत पुराण का पाठ ।
  • शुक्र – लक्ष्मी जी की उपासना, श्री सूक्त का पाठ ।
  • शनि – श्री भैरव जी की उपासना व शराब से परहेज
  • राहु – सरस्वती जी की उपासना ।
  • केतु – श्री गणेश जी की उपासना ।

दान द्वारा ग्रहों के उपाय

लाल किताब के अनुसार खराब ग्रहों के दुष्प्रभावों से मुक्ति के लिए निम्न वस्तुओं का दान करना चाहिए ।

  • सूर्य – तांबा, गेहूं व गुड़ ।
  • चंद्र- चावल, दूध, चांदी या मोती।
  • मंगल – मूंगा, मसूर दाल, खांड, सौंफ ।
  • बुध – हरी घास, साबुत मूंग, पालक ।
  • गुरु – केसर, हल्दी, सोना, चने की दाल का दान ।
  • शुक्र – दही, खीर, ज्वार या सुंगधित वस्तु ।
  • शनि – साबुत उड़द, लोहा, तेल या तिल ।
  • राहु – सिक्का, जौ या सरसों ।
  • केतु – केला, तिल या काला कंबल ।

ग्रहों के अन्य उपाय

उपरोक्त उपायों के अतिरिक्त ग्रहों के दुष्प्रभावों के और भी अनेक सामान्य उपाय जिनका विवरण यहां प्रस्तुत है।

सूर्य – बहते पानी में गुड़ बहाएं, प्रत्येक कार्य मीठा खा कर व जल पी कर करें, सूर्यकाल में संभोग न करें, कुल रीति रिवाजों को मानें, सूर्य की वस्तुएं बाजरा आदि मुफ्त में न लें, अंधों को भिक्षा दें पीतल के बर्तनों का उपयोग करें और सफेद टोपी पहनें।

चंद्र – चांदी के बर्तन में दूध या पानी पीएं सोने को आग में लाल कर दूध से बुझाएं व दूध पीएं. चारपाई के पायों पर तांबे की कील गाड़ें, समुद्र में तांबे का पैसा डालें, शिवजी को आक के फूल चढ़ाएं, सफेद कपड़े में मिश्री व चावल बांधकर बहाएं, वटवृक्ष में पानी डालें, दूध का व्यापार न करें, श्मशान का पानी घर लाकर रखें और रात को दूध न पीएं।

मंगल – बुआ या बहन को लाल कपड़े दें, भाई की सहायता करें, रेवड़ियां बताशे पानी में बहाएं आग से संबंधित काम करें, मीठी तंदूरी रोटी कुत्ते को डालें, तीन धातुओं की अंगूठी पहनें, चांदी गले में पहनें, मसूर की दाल पानी में बहाएं, नीम का पेड़ लगाएं, रोटी पकाने से पहले तवे पर पानी के छींटे दें, जंग लगा हथियार घर में न रखें, काने, गंजे या काले व्यक्ति से दूर रहें, और दूध वाला हलवा खाएं।

बुध – नाक छेदन न करें, तांबे का पैसा गले में डालें, कच्चा घड़ा जल में बहाएं, चांदी व सोने की जंजीर पहनें, किसी साधु से ताबीज न लें, मिट्टी के बर्तन को शहद से भर कर वीराने में दबाएं, पक्षियों की सेवा करें, गाय को हरी घास दें, बार-बार न थूकें, वर्षा का पानी छत पर रखें साली को साथ न रखें, साझा काम न करें और ढाक के पत्तों को दूध से धोकर वीराने में दबाएं।

गुरु – मंदिर में 43 दिनों तक बादाम अर्पित करें, गंधक जल में बहायें, केसर पानी में बहाएं, नीले कपड़े में चना बांध कर मंदिर में दें, वायदा निभाएं, ईर्ष्या से बचें, पीपल न काटें, हल्दी व केसर का तिलक करें पत्नी से गुरु का व्रत रखवाएं, परस्त्री गमन न करें।

शुक्र – गंदे नाले में 43 दिनों तक नीला फूल डालें, स्त्री का सम्मान करें प्रेम व ऐयाशी से दूर रहें, किसी की जमानत न दें और कांसे के बर्तन का दान ।

शनि – तेल या शराब 43 दिनों तक प्रातः काल धरती पर गिराएं, कौओं को रोटी डालें, शराब व मांस का सेवन न करें, लोहे का दान दें, सुनसान जगह पर सुरमा दबाएं, वे चिमटे या अंगीठी का दान दें।

राहु – बहते पानी में नारियल बहाएं हाथी के पांव की मिट्टी कुएं में डालें, संयुक्त परिवार में रहें, पत्नी के साथ फिर फेरे लें, रसोई में बैठकर खाना खाएं, ससुराल से संबंध न बिगाड़ें, भाई बहन का बुरा न करें, सिर पर चोटी रखें और रात को तकिये के नीचे सौंफ व चीनी रखें।

केतु – केसर का तिलक लगाएं कुत्ता पालें, तिल का दान करें, परस्त्री गमन न करें मकान की नींव में शहद दबाएं. काला व सफेद कंबल मंदिर में दान दें, पैरों के अंगूठों में चांदी पहनें, चाल-चलन ठीक रखें, गले में सोना पहनें, बायें हाथ में सोने की अंगूठी पहनें।

उपायों से पूर्व उपाय

विभिन्न ग्रहों के विभिन्न उपाय करने से पहले निम्नलिखित उपाय अवश्य करें। शाकाहारी भोजन करें, विधवाओं और अतिथियों की सेवा करें, माता पिता का आदर करें, किसी को अपशब्द न कहें, दिन में संभोग न करें, देवी देवताओं की पूजा करें, ससुराल के सदस्यों का सम्मान करें शराब न पीएं टूटे बर्तन घर में न रखें घर में एक कच्ची जगह अवश्य रखें, प्रतिदिन बड़ों से आर्शीर्वाद लें और परस्त्री गमन न करें।

कुछ विशेष उपाय

  • बच्चे के सुरक्षित पैदाइश के लिए जौ का पानी बोतल में भरकर पास रख लें।
  • सुखी प्रसव हेतु व गर्भपात से बचने के लिए अपने भोजन का एक हिस्सा निकालकर कुत्ते को दें।
  • बार-बार गर्भपात होता हो, तो गर्भवती स्त्री के बाजू पर लाल धागा बांध दें।
  • बेटे से संबंध सुधारने के लिए काले सफेद कंबल मंदिर में दें।

कुछ विशेष सावधानियां

  • सूर्य भाव 7 या भाव 8 का हो तो सुबह व शाम को दान न करें।
  • चंद्र यदि भाव 6 का हो तो दूध या पानी दान न करें और यदि भाव 12 का हो तो साधु या महात्मा को खाना न दें और बच्चों को निःशुल्क शिक्षा न दिलाएं।
  • गुरु यदि भाव 7 का हो तो मंदिर के पुजारी को वस्त्र दान न करें और यदि 10 का हो तो मंदिर न बनवाएं।
  • शुक्र यदि भाव 9 का हो तो भिखारी को पैसा न दें और यदि 8 का हो तो सराय या धर्मशाला न बनवाएं।

ग्रहों के शुभ प्रभावों को बढ़ाने के उपाय

इसके लिए संबद्ध ग्रह की वस्तु स्वयं किसी अन्य को न देनी चाहिए, वरन् उस वस्तु को उसके कारक से लेकर अपने पास रखना चाहिए। जैसे शुभ चंद्र को बलवान करने के लिए माता (चंद्र) के हाथ से चांदी की वस्तु (चंद्र की वस्तु) को लेकर अपने पास रखना चाहिए।

ग्रहों के अशुभ प्रभावों को दूर करने के उपाय

किसी कष्टकारी ग्रह की वस्तु को पृथ्वी में गाड़ कर उस ग्रह के दोष को दूर करना ।

जैसे यदि अशुभ शनि षष्ठ भाव (पाताल) में स्थिति होकर अत्यंत कष्टकारी हो तो शनि की वस्तु सरसों के तेल को मिट्टी के बर्तन (बुध-षष्ठ राशीश) में भरकर और उसका ढक्कन अच्छी तरह बंद कर किसी तालाब के किनारे (शुक्र स्थान, जो शनि का मित्र है) गाड़ देने से शनि शांत हो जाता है और इस तरह कष्टों का निवारण हो जाता है।

थोड़े अशुभ प्रभावों को दूर करना

थोड़े अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए संबद्ध ग्रह से संबंधित वस्तु को चलते पानी में बहाना । जैसे यदि राहु अष्टम भाव (शमशान) में अचानक बाधाएं दे रहा हो तो सीसा धातु (राहु) के 100 ग्राम वजन के आठ टुकड़े (शनि अष्टम भाव का कारक ग्रह ) प्रतिदिन एक टुकड़ा बहते पानी में प्रवाहित करने से राहु जनित पीड़ा की शांति होती है।

थोड़ा शुभ और थोड़ा अशुभकारी ग्रह को पूर्ण शुभकारी बनाने के लिए उसके मित्र ग्रह को प्रसन्न कर उसकी सहायता लेना । जैसे यदि षष्ठ भाव (पाताल) में केतु बुरा फल दे रहा हो तो जातक को छोटी उंगली (बुध) में सोने (बृहस्पति) की अंगूठी (बुध) पहनने से षष्ठ राशीश बुध और बृहस्पति (केतु के गुरु) प्रसन्न होकर केतु पर अंकुश रखते हैं।

थोड़े अशुभ ग्रह के प्रभाव को खत्म करने के लिए उस ग्रह के परम शत्रु की वस्तु अपने पास रखना । जैसे अष्टम भाव स्थित मंगल के थोड़े अशुभ प्रभाव को समाप्त करने के लिए हाथी दांत (राहु-मंगल का शत्रु) की कोई वस्तु अपने पास रखनी चाहिए।

किसी शुभ ग्रह की अशुभता दूर करने के लिए संबंधित वस्तु को उसके दूसरे कारक को अर्पित करना । जैसे बृहस्पति की अशुभता दूर करने के लिए चने की कच्ची दाल (बृहस्पति की वस्तु) मंदिर (धर्म स्थान- बृहस्पति) में चढ़ानी चाहिए। परंतु मंदिर में कोई वस्तु चढ़ाने से पहले यह देख लेना आवश्यक है कि कुंडली के दूसरे भाव (धर्म स्थान) में उस ग्रह का शत्रु स्थित न हो, अन्यथा नुकसान होगा।

ग्रह के इष्ट देव की आराधना करना । जैसे यदि षष्ठ भाव (पाताल) स्थित राहु समझ न आने वाला रोग दे रहा हो तो नीले फूलों (राहु की वस्तु) से देवी सरस्वती (राहु की इष्ट देवी) की पूजा आराधना करनी चाहिए. इससे रोग से छुटकारा मिलता है।

दो अशुभ ग्रहों का झगड़ा मिटाने के लिए उनके मित्र ग्रह को उनके बीच में स्थापित करना । जैसे शनि और सूर्य (विपरीत स्वभावी ग्रह) षष्ठ भाव (पाताल) में स्थित होकर अशुभ प्रभाव डालते हों, तो उनके साथ में बुध को (जो सूर्य और शनि दोनों का मित्र है) स्थापित करने के लिए घर में फूलों वाले पौधे (बुध की वस्तु) लगाने चाहिए।

उपाय के लिए विशेष नियम

  • ग्रहों के दुष्प्रभाव शीघ्र दूर करने के लिए 43 दिन तक प्रतिदिन उपाय करने चाहिए। यदि बीच में प्रयोग खंडित हो जाए तो फिर से शुरू करें।
  • ये उपाय दिन के समय करने चाहिए।
  • एक दिन में केवल एक ही उपाय करना चाहिए।
  • जातक के असमर्थ होने पर खून के रिश्ते वाला कोई व्यक्ति उसके नाम से यह उपाय कर सकता है। क्या नहीं करें
  • सूर्य ग्रह कुंडली में बलवान होने पर जातक को सूर्य की वस्तुएं सोना, गेहूं, गुड़ व तांबे का दान नहीं करना चाहिए अन्यथा सूर्य निर्बल हो जायेगा।
  • चंद्र बलवान होने पर चांदी, मोती, चावल आदि (चंद्र की वस्तुए) उपहार या दान में नहीं देने चाहिए।
  • मंगल बलवान होने पर – मिठाई, गुड़, शहद आदि मंगल की वस्तुएं दूसरों को न तो देने चाहिए न ही खिलाने चाहिए।
  • बुध बलवान होने पर कलम का उपहार नहीं देना चाहिए।
  • बृहस्पति बलवान होन पर पुस्तकों का उपहार नहीं देना चाहिए।
  • शुक्र बलवान होने पर सिले हुए सुंदर वस्त्र, सेंट (परफ्यूम) और आभूषण उपहार में नहीं देने चाहिए।
  • शनि बलवान होने पर शनि की वस्तु – शराब दूसरों को नहीं पिलानी चाहिए।
  • राहु को बलवान करने के लिए जातक को सीसे (राहु की वस्तु) की गोली अपने पास रखनी चाहिए।
  • केतु को बलवान करने के लिए कुत्ता (केतु का कारक ) पालना चाहिए।

ऊपर वर्णित सरल और सुलभ उपायों का आवश्यकतानुसार श्रद्धापूर्वक पालन करने से जातक को ग्रह जनित पीड़ा से मुक्ति मिलती है और जीवन सुखमय होता है।

बृहस्पति के द्वादश भावों में शुभ-अशुभ के आम उपाय

1. बृहस्पति वार का व्रत रखना।

2. हरि पूजन करना या पीपल की पालन करना ।

3. श्री विष्णु भगवान् को नमस्कार करना ।

4. पुखराज पहनना, पुखराज के अभाव में हल्दी की गट्ठी पीले रंग के धागे में बांध कर दायीं भुजा पर बांधना ।

5. चांदी की कटोरी में केसर / हल्दी का तिलक करना ।

6. शुद्ध सोना धारण करना (बृहस्पति षष्ठ भाव को छोड़कर) ।

7. नाभि (धुनी) पर केसर लगाना या केसर खाना ।

8. ब्राह्मण कुल पुरोहित या साधू की सेवा करना ।

9. गरुड़ पूजा (गरुड़ पुराण) करना।

10. घर की दीवारों पर पीला रंग करना।

11. पीले फूल (गेंदा या सूरजमुखी) लगाना ।

12. बृहस्पति उच्च हो तो बृहस्पति की चीजों का दान न देना।

13. बृहस्पति नीच हो तो बृहस्पति की चीज़ों का दान न लेना।

नोट – उपरोक्त उपाय 43 दिन या सप्ताह या माह लगातार करने चाहिए ।

सूर्य के द्वादश भावों में शुभ-अशुभ के आम उपाय

1. रविवार का व्रत रखना।

2. हरिवंश पुराण की कथा करना या सुनना सूर्य को मीठा डाल कर अर्घ्य देना ।

3. गेहूं, गुड़, तांबा आदि का दान करना।

4. चाल-चलन ठीक रखना ।

5. माणिक्य (लाल) धारण करना, माणिक्य के अभाव में तांबा धारण करें।

6. तांबे का पैसा चलते पानी में बहाना।

7. घर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर रखना

8. घर का आंगन खुला रखना।

9. बन्दर को गुड़ और गन्दम देना या बन्दर की पालन करना ।

10. भूरी चीटिंयों को तिरचौली सांयकाल डालना (सूर्यास्त से पहले) ।

11. राजकर्मियों की सेवा करना।

12. चारपाई के पायों में तांबे के कील गाड़ना ।

13. ब्लैक मार्किटिंग करने वाला स्मगलर-स्टोरियां न बनना ।

14. सूर्य उच्च हो तो सूर्य की चीजों का दान न देना ।

15. सूर्य नीच हो तो सूर्य की चीज़ों का दान न लेना ।

नोट – उपरोक्त उपाय 43 दिन या सप्ताह या मास लगातार करने चाहिए।

चन्द्र के द्वादश भावों में शुभ-अशुभ के आम उपाय

1. सोमवार का व्रत रखना।

2. शिवजी की पूजन करना, अमरनाथ जी की यात्रा या पूजन करना।

3. चावल, चान्दी, दूध आदि का दान करना ।

4. सुच्चा मोती (दूध रंग) धारण करना, मोती के अभाव में चांदी धारण करना ।

5. दूध का बर्तन रात को सिरहाने रख कर सुबह कीकर के वृक्ष पर डालना।

6. माता (दादी/नानी/सास/मौसी/मामी) का आशीर्वाद लेना ।

7. चारपाई के पायों में चांदी के कील गाड़ना ।

8. आसमानी बर्फ (ओले) शीशी में रखना या गंगा जल का प्रयोग करना ।

9. श्मशान भूमि में स्थित कुएं पर कभी-कभी स्नान करना या चावल या चांदी शमशान की चारदीवारी के अंदर गिराना ।

10. चलते पानी में (गंगा) स्नान करना।

11. छत पर पानी की टैंकी गोल न बनवाना या न लगाना (चौरस का वहम नहीं)।

12. घर की पानी की टैंकी को 3-6 महीने में सफाई करवाते रहना ।

13. सीढ़ियों के ऊपर / सामने हैण्डपम्प न रखना।

14. घर की छत के नीचे कुआं या हैण्डपम्प न लगाना ।

15. चन्द्र उच्च हो तो चन्द्र की चीजों का दान न देना।

16. चन्द्र नीच हो तो चन्द्र की चीज़ों का दान न लेना ।

नोट – उपरोक्त उपाय 43 दिन या सप्ताह या मास लगातार करने चाहिए।

शुक्र के द्वादश भावों में शुभ-अशुभ के आम उपाय

1. शुक्रवार का व्रत करना।

2. आम लोगों की पालन करना या घर में मेहमानों को भोजन कराना।

3. घी, दही, कर्पूर, अभ्रक, दही आदि का धर्म मन्दिर में दान करना या जल प्रवाह करना ।

4. बछड़े, खाली गाय या कपिला गाय का दान करें या सेवा करना ।

5. हीरा पहनना, हीरे के अभाव में सुच्चा मोती पहनना ।

6. गाय का दान, चरी का दान करना।

7. स्त्री का कहना मानना, स्त्री की सेवा करना या स्त्री से झगड़ा न करना ।

8. इत्र या सैंट कपड़ों पर लगाना, क्रीम पाऊडर शरीर पर लगाना ।

9. पोशाक ठीक रखना और दिन में एक-दो बार बदलना।

10. अपनी स्त्री से दो बार विवाह करना।

11. पोशाक फटी हुई या जली हुई धारण न करना।

12. शुक्र उच्च हो तो शुक्र की चीजों का दान न देना ।

13. शुक्र नीच हो तो शुक्र की चीजों का दान न लेना ।

नोट – उपरोक्त उपाय 43 दिन या सप्ताह या माह लगातार करने चाहिये।

मंगल के द्वादश भावों में शुभ-अशुभ के आम उपाय

1. मंगलवार का व्रत रखना।

2. महागायत्री का पाठ करना हनुमान जी को सिन्दूर लगाना ।

3.दाल मसूर, मूंगा, शहद या सिंदूर आदि का दान देना या जल में प्रवाह करना ।

4. खाने के बाद मेहमानों को मीठा (सौंफ – चीनी या मिश्री) खिलाना ।

5. मंगल अशुभ हो तो रेवड़ियां (गुड़ + तिल) जल प्रवाह करना ।

6. मंगल (शुभ हो तो) मिठाई – मीठा भोजन का दान या पताशे चलते पानी में बहाना ।

7. मूंगा (लाल) धारण करना, मूंगे के अभाव में तांबा धारण करें।

8. भाई की सेवा करना ।

9. मृगछाला (हिरण की खाल) पर सोना ।

10. जौ (अनाज) गऊ के पेशाब से धोकर लाल रुमाल (कपड़े में बांध कर रखना ।

11. वस्त्र लाल निशान लगा कर धारण करना या लाल रुमाल पास रखना ।

12. शुद्ध चांदी धारण करना।

13. धरेक (ढेक) के वृक्ष, काना, काला, गंजा निःसंतान व्यक्ति से दूर रहना ।

14. मंगल उच्च की हो तो उसकी चीज़ों का दान न देना।

15. मंगल नीच या अशुभ हो तो उसकी चीजों का दान न लेना, निःसंतान व्यक्ति से धन-जायदाद न खरीदना या मुफ्त न लेना।

नोट – उपरोक्त उपाय 43 दिन या सप्ताह या माह लगातार करने चाहिए।

बुध के द्वादश भावों में शुभ-अशुभ के आम उपाय

1. बुधवार का व्रत करना।

2. दुर्गा पाठ करना, कन्याओं का आशीर्वाद लेना या दुर्गा तीर्थों की यात्रा करना ।

3. मूंग साबुत हरी चीजें दान देना या जल प्रवाह करना ।

4. रेडियों, टेलीविजन, घड़ियां, मीटर, टाईप राइटर, कैलकुलेटर, गाने-बजाने के यन्त्र आदि ठीक रखना ।

5. तांबे के पैसे में सुराख करके चलते पानी में बहाना।

6. पन्ना धारण करना, पन्ने के अभाव में कलाई (धातु) धारण करें।

7. बकरी, तोते की सेवा करना।

8. हरा रंग निषेध और नाक, घण्टा छेदन करना।

9. लड़की/बहन/बुआ/मौसी/साली की सेवा करें या उनका आशीर्वाद लेना ।

10. तड़ागी या बैल्ट बांधना।

11. पीली कौडियों को जला कर चलते पानी में बहाना ।

12. हिजड़ों को हरी चूड़ियां, हरे रंग के कपड़े आदि देना ।

13. घर में जल-भभूती धागे-ताबीज न रखना, दुनियावी साधू-महात्मा की तस्वीर घर में न लगाना धार्मिक गन्थ बन्द करके न रखना।

14. बुध उच्च हो तो बुध की चीज़ों का दान न देना ।

15. बुध नीच हो तो बुध की चीज़ों का दान न लेना ।

शनि के द्वादश भावों में शुभ-अशुभ के आम उपाय

1. शनिवार का व्रत करना।

2. राजा की सेवा करना या उसका हुक्म मानना, भैरों की स्तुति या भैरों के मन्दिर में शराब देना ।

3. मांह (उड़द) चमड़े (वैल्ट, पर्स, जूता आदि), लोहे का सामान (तवा चिमटा आदि) दान देना या जल प्रवाह करना।

4. काली भैंस की पालन करें या सांप को दूध पिलाना ।

5. तेल शराब का दान करना या झूठ न बोलना।

6. शराब न पीना, मांस और मछली न खाना।

7. नीलम धारण करना। नीलम के अभाव में किश्ती के कील की अंगूठी या काले घोड़े की नाल की अंगूठी धारण करना ।

8. ताया-चाचा की सेवा करना और उनका आशीर्वाद लेना ।

9. काले कीड़ों को तिरचौली सांय काल डालना ।

10. रोटी पर सरसों का तेल लगा कर कुत्ते और कौवे को देना ।

11. मज़दूर व्यक्ति की मेहनत न रखना।

12. शनि नीच हो तो शनि की चीज़ों का दान न लेना।

13. शनि उच्च हो तो शनि की चीज़ों का दान न देना।

राहु के द्वादश भावों में शुभ-अशुभ के आम उपाय

1. सरस्वती वंदना या आराधना करें।

2. दहेज में बिजली का सामान, नीले रंग के कपड़े, स्टील के बर्तन न लेना ।

3. कन्यादान करना ।

4. सरसों, नीलम, तम्बाकू दान देना ।

5. स्टील के बर्तन (बिना इस्तेमाल किए ) बन्द न रखना, नीला कपड़ा या नीलम न पहनना ।

6. मूली का दान करना, कच्चे कोयले जल प्रवाह करना या जौ का तुला दान करना ।

7. गोमेदक धारण करना । गोमेदक के अभाव में सिक्का धारण करना ।

8. झूठी गवाही न देना, गवन न करना, ससुराल से अच्छे संबंध रखना।

9. परिवार से अलग न रहना या परिवार में मुखिया न बनना ।

10. पक्षियों को सतानाज सूर्योदय के बाद डालना ।

11. तम्बाकू का इस्तेमाल न करना ।

12. घर में या आंगन में धुआं (गोबर, लकड़ी आदि न जलाना) न करना ।

13. रसोई में (चिमनी) धुंआदानी न रखना।

14. झूठी गवाही न देना या झूठ न बोलना।

15. राहु उच्च हो तो राहु की चीज़ों का दान न देना ।

16. राहु नीच हो तो राहु की चीज़ों का दान न लेना ।

केतु के द्वादश भावों में शुभ-अशुभ के आम उपाय

1. गणेश वंदना या आराधना करें, गणेश चतुर्थी का व्रत करना, दहेज़ में दो चारपाईयां (पलंग) और सोने की अंगूठी जरूर लेना ।

2. कपिला गाय का दान देना या सेवा करना, गौशाला में चारा आदि देना ।

3. तिल, नींबू, केला आदि दान देना या जल प्रवाह करना ।

4. नवार – सुतड़ी (चारपाई बुनाने के लिए) पड़ी हो तो उसकी चारपाई बुनवा लें या खोलकर जल प्रवाह कर दे।

5. कुत्ते (काले-सफेद) को भोजन का हिस्सा देना या कुत्ता (काला-सफेद) पालना ।

6. दोरंगा पत्थर या होलदरी पहनना।

7. चाल-चलन ठीक रखना ।

8. लड़कों (9 वर्ष से छोटे) की सेवा करना।

9. खटाई वाली चीजें (नींबू, इमली या गोल गप्पे) कन्याओं (9 वर्ष से छोटी) को खिलाना ।

10. काला- सफेद कम्बल का धर्म स्थान में संकल्प दान देना या काले सफेद कम्बल का टुकड़ा शमशान में दबाना ।

11. काले और सफेद तिल जल प्रवाह करना ।

12. नपुंसकता के समय सोने का कुश्ता, चांदी का कुश्ता, फौलाद का कुश्ता वंग भस्म, मछली का तेल या तिला आदि बाजीकरण औषधियों का प्रयोग करना किसी वैद्य की सलाह से ।

13. केतु उच्च तो राहु की चीजों का दान न देना।

14. केतु नीच हो तो राहु की चीजों का दान न लेना ।

कालसर्पदोष से मुक्ति के लिए लाल किताब के अचूक उपाय

कालसर्प का संबंध पितृ दोष से है। इस योग से प्रभावित व्यक्ति का जीवन तनावपूर्ण और संघर्षमय रहता है। उसके कार्यों में बाधाएं आती रहती हैं। उसके विवाह और विवाहित होने की स्थिति में संतानोत्पत्ति में विलंब होता है। इसके अतिरिक्त शिक्षा में बाधा, दाम्पत्य जीवन कलह, मानसिक अशांति, रोग, धनाभाव, प्रगति में रुकावट आदि की संभावना रहती है।

कुंडली के जिस भाव से कालसर्प की सृष्टि होती है, उस भाव से संबंधित कष्टों की प्रबल संभावना रहती है। ज्योतिष की अन्य विधाओं की भांति लाल किताब में भी कालसर्प दोष के शमन के कुछ उपाय बताए गए हैं जिनका भावानुसार संक्षिप्त विवरण यहां प्रस्तुत है।

प्रथम भाव में राहु और सप्तम भाव में केतु हो तो

  • अपने वजन के बराबर जौ या गेहूं अथवा कोई अन्य खाद्यान्न बहते जल में प्रवाहित करें।
  • किसी भी प्रकार का राजकीय कोप होने पर अपने वजन के बराबर कोयला बहते जल में में प्रवाहित करें।
  • बीमार होने की स्थिति में मसूर की दाल और एक सिक्का 3 दिन तक प्रतिदिन भंगी को दें।
  • धन की प्राप्ति के लिए बिल्ली की जेर कपड़े में बांधकर घर में रखें।
  • चांदी की चेन धारण करें।
  • बहते पानी में नारियल प्रवाहित करें।

द्वितीय में राहु और अष्टम में केतु हो तो

  • चांदी की डिबिया में सोने या चांदी की ठोस गोली केसर के साथ सदैव अपने पास रखें।
  • हाथी के पैरों की मिट्टी कुएं में गिराएं।
  • धार्मिक स्थान में केसर और चंदन दान करें। साथ ही प्रत्येक धर्म स्थल में यथासमय यथा योग्य सेवा अर्चना करते रहें।
  • कानों में सोना पहनें।

तृतीय भाव में राहु और नवम भाव में केतु हो तो

  • घर में हाथी का दांत और सोने का टुकड़ा रखें।
  • बुद्धिजीवी वर्ग का सदैव आदर करें।
  • कुत्ता पालें। यदि वह मर जाए या भाग जाए दूसरा ले आएं।

चतुर्थ भाव में राहु और दशम भाव में केतु हो तो

  • घर में चांदी की डिबिया में शहद भरकर रखना चाहिए।
  • चांदी धारण करें।
  • कोई नया कार्य या रुका पड़ा कार्य संपन्न करने से पहले 400 ग्राम साबुत धनिया एवं 400 ग्राम बादाम बहते जल में प्रवाहित करें।
  • मकान की केवल छत कभी न बदलें बदलना हो तो पूरा घर पुनः बनवाएं।

पंचम में राहु और एकादश में केतु हो तो

  • चांदी का हाथी बनाकर घर में रखें।
  • शराब और मांस से दूर रहें।
  • रात के समय पत्नी के सिराहने में पांच मूलियां रखें और प्रातः उठकर उन्हें मंदिर में दान करें।
  • किसी कार्य हेतु घर से निकलने से पूर्व सोने को गर्म कर दूध में बुझाएं और उसमें केसर मिलाकर पीएं। केसर का तिलक करें।

षष्ठ में राहु और द्वादश भाव में केतु हो तो

  • मां सरस्वती की मूर्ति घर में रखें और उस पर नित्य नीले रंग के फूल चढ़ाएं (कम से कम छः दिन नियमित) ।
  • हमेशा कुत्ता पालें। यदि मर जाए या भाग जाए तो दूसरा पालें ।
  • बहते पानी में मूंग प्रवाहित करें।

सप्तम में राहु और लग्न में केतु हो तो

  • चांदी की ईंट बनवाकर घर में रखें।
  • शनिवार को 105 बादाम या 7 नारियल बहते जल में प्रवाहित करें। संयम बरतें, विवाहेतर संबंध से बचें।

अष्टम में राहु और द्वितीय में केतु हो तो

  • चांदी का चौकोर टुकड़ा हमेशा अपनी जेब में रखें।
  • व्यापार ठप होने की स्थिति में 43 दिन तक खोटे सिक्के बहते पानी में बहाएं ।
  • प्रतिदिन घर से निकलते समय केसर या हल्दी का तिलक करें।

नवम में राहु और तृतीय में केतु हो तो

  • कुत्ता पालें ।
  • घर का मुखिया न बनें।
  • सिर पर चोटी रखें और तिलक लगाएं।
  • बहते पानी में चावल एवं गुड़ प्रवाहित किया करें।
  • भाइयों से विवाद न करें।

दशम में राहु और चतुर्थ में केतु हो तो

  • नीले, काले रंग की टोपी या पगड़ी पहनें।
  • मसूर की दाल या गुड़ बहते जल में प्रवाहित करें।
  • प्रतिकूल घटनाओं से बचने के लिए बहते पानी में नींबू प्रवाहित करें।
  • दूध में गर्म सोना बुझाकर पीने से लाभ होगा।
  • कानों में सोना धारण करें।

एकादश में राहु और पंचम में केतु हो तो

  • ब्राह्मणों को सोना व पीले वस्त्र दान करें और स्वयं तिलक करें ।
  • गुड़, चावल, दूध आदि बहते पानी में प्रवाहित करें।
  • चांदी के गिलास में पानी पीया करें।
  • गुरुवार को पीले कपड़े में चने या चने की दाल बांधकर दान करें तथा उस दिन लहसुन और प्याज का सेवन न करें।

द्वादश में राहु और षष्ठ में केतु हो तो

  • योगासन करते रहें।
  • रात को सोते समय लाल कपड़े में सौंफ और मिश्री बांधकर सिरहाने में रखें।
  • भोजन रसोई घर में बैठकर करें।
  • सोने की अंगूठी धारण करें।
  • दूध में केसर मिलाकर या सोना बुझाकर पीएं।
  • कुंडली में जिस भाव से पूर्ण या आंशिक कालसर्प योग बन रहा हो उसी के अनुरूप उक्त उपाय करने चाहिए।
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